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!!भारतीय ज्ञान परंपरा में अलंकार विमर्श!!

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साहित्य शास्त्र में अलंकार शब्द का प्रयोग आभूषण के अर्थ में , सौंदर्य के अर्थ में किया जाता है। जैसा कि अमर सिंह ने अमरकोश में वर्णन किया -"(अलंकारस्तु आभरणं परिष्कार विभूषणम्)"। अलंकार यह शब्द "अलम" इस उपपद के रहते " कृधातु " से "घञ" प्रत्यय करके अलंकार शब्द की निष्पत्ति होती है। अलंकार का लक्षण आचार्य भामह करते हैं ,"( काव्यशोभा कराधर्मविषेशाः अलङ्कारः)"। आचार्य दंडी लक्षण इस प्रकार करते हैं"( काव्यशोभा करान् धर्मान् अलङ्कारः प्रचक्षते)"। प्राचीन काव्य तत्व मीमांसको  के मत में काव्य में अलंकार की महती उपयोगिता प्रतिपादित की गई है। जैसा जयदेव भी मानते हैं कि काव्य में अलंकार का होना अत्यावश्यक है , चाहे वह व्यक्त हो अथवा अभिव्यक्त रूप में ही क्यों न हो। अलंकार का लक्षण देते हुए जयदेव कहते हैं- " अङ्गीकरोति यः काव्यम् शब्दार्थ अनलङ्कृति ” असौ न मन्यते कस्मात् अनुष्णमनलङ्कृति"।।   जयदेव  के इस वचन से यह प्रमाणित होता है कि काव्य में अलंकारों की उपयोगिता होती ही है। अलंकार शब्द की व्युत्पत्ति इस प्रका...